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सब्सिडी से हेली सेवाओं का विस्तार करेगी उत्तराखंड सरकार
September 7, 2019 • संपादक राजीव मैथ्यू

सब्सिडी से हेली सेवाओं का विस्तार करेगी उत्तराखंड सरकार

(फोटो-: सभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री)

सेवा भारत टाइम्स ब्यूरो 

देहरादून। उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में हेली कनेक्टिविटी को रफ्तार देने के लिए त्रिवेंद्र सरकार हेलीकॉप्टर कंपनियों को हेली सेवाएं संचालित करने पर केंद्र के अलावा अलग से सब्सिडी देगी। शनिवार को उत्तराखंड और देश का पहला हेलीकॉप्टर समिट में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह घोषणा की है। उड़ान योजना के तहत हेली सेवाओं के प्रोत्साहन के लिए केंद्र सरकार की तरफ से भी हेली कंपनियों को अनुदान दिया जा रहा है। लेकिन प्रदेश में में हेली सेवाएं देने वाली कंपनियों को राज्य सरकार केंद्र के अनुदान के अलावा अतिरिक्त सब्सिडी देगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में हर साल हेलीकॉप्टर समिट आयोजित करने का भी एलान किया है। 


शनिवार को सहस्त्रधारा हैलीपैड स्थित हेली ड्रोम में पर्वतीय राज्यों में हेली कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, प्रदेश सरकार और फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से देश का पहला हेलीकॉप्टर समिट आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में हेलीकॉप्टर निर्माता, आपरेटर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। समिट का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में हेली सेवाओं के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सरकार का हेली कनेक्टिविटी बढ़ाने पर फोकस है।

सीमांत जिला पिथौरागढ़ तक सड़क मार्ग से पहुंचने में 20 घंटे का समय लगता है। जबकि हेलीकॉप्टर से मात्र डेढ़ घंटे में पहुंचा जा सकता है। लेकिन पिछले लंबे से पिथौरागढ़ की हेली सेवा बंद पड़ी है। प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ विदेशी पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ रही है। इसके साथ ही उत्तराखंड फिल्मों की शूटिंग के लिए डेस्टिनेशन बना है। जिससे प्रदेश में हेली सेवाओं का विस्तार करने की जरूरत है। प्राकृतिक आपदा की दृष्टि से राज्य संवेदनशील है। आपदा प्रभावितों को बचाने व राहत कार्य के लिए हेली सेवाएं बहुत ही उपयोगी है। सरकार प्रदेश में हेली एंबुलेंस की सेवा देना चाहती है। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में एक भी कंपनी नहीं आई है। दूरस्थ क्षेत्रों में गंभीर रूप से बीमार लोगों को हायर सेंटर कम समय में पहुंचाने के लिए  हेली एंबुलेंस जरूरी है।

समिट में सरकार ने हेली कंपनियों को उड़ान योजना के तहत हेली सेवाएं संचालित करने का आफर दिया है। सरकार सहस्त्रधारा हेलीपैड स्थित हेली ड्रोम को पीपीपी मोड देने के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगी। सरकार ने इच्छुक कंपनियों से टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने को कहा है। प्रदेश में वर्तमान में 51 हेलीपैड, एक एयरपोर्ट, एक हवाई पट्टी है। सी प्लेन के लिए टिहरी में वाटर एयर ड्रोम विकसित किया जा रहा है। सरकार ने हेली आपरेटरों को अवगत कराया कि प्रदेश में सालाना औसतन 2 लाख लोग हेली सेवा की सुविधा ले रहे हैं। 


हेलीकॉप्टर समिट में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला, संयुक्त सचिव उषा पाधी, प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, मेयर सुनील उनियाल गामा, एयरबस इंडिया के चेयरमैन एवं फिक्की के सिविल एविएशन के चेयरमैन आनंद स्टेनले, लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मसूरी के निदेशक संजीव चोपड़ा, प्रदेश नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव दिलीप जावलकर, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आरके जैन, यूकाडा की सीईओ सोनिया समेत हेली निर्माता, आपरेटर्स और स्टेक होल्डर मौजूद थे।