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मनोकामना पूर्ति का प्रमुख स्थान : जानें
September 30, 2019 • मुख्य संपादक राजीव मैथ्यू

 

मनोकामना पूर्ति का प्रमुख स्थान

मां भगवती सुरकंडा की सारण में जो भी जाता मां उसकी मनोकामना पूरी करती है

नवरात्री में जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर

मां भगवती सुरकंडा की आराधना करता है

उसे देवी मनवांचित फल देती है।

सरोजनी सकलानी

देश के पर्वतीय प्रदेश उत्तराखण्ड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां देवी-देवताओं के हजारों प्रमुख स्थान और सिद्धपीठ हैं। इनमें से ही एक प्रमुख सिद्धपीठ है मां भगवती सुरकंडा देवी। सुरकंडा देवी हिन्दूओं का एक प्राचीन शक्ति केन्द्र है। यह मंदिर देवी दुर्गा माता को समर्पित है जो कि नौ देवी के रूपों में से एक है। सुरकंडा देवी मंदिर 51 शक्ति पीठ में से है। सुरकंडा देवी मंदिर में देवी काली की प्रतिमा स्थापित है। यह मंदिर यूलिसाल गांव, धानोल्टी, टिहरी जनपद, उत्तराखंड, भारत में स्थित है।

सुरकंडा देवी मंदिर धनोल्टी से 6.7 किलोमीटर और चम्बा से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचाने के लिए लोगों को कद्दूखाल से 3 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है। यह मंदिर लगभग 2,757 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। सुरकंडा देवी मंदिर घने जंगलों से घिरा हुआ है। इस स्थान से उत्तर दिशा में हिमालय का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है। दक्षिण दिशा में देहरादून और ऋ़षिकेश शहरों का सुन्दर नजारा भी यहां से दिखाई देता है। यह मंदिर साल में ज्यादातर समय कोहरे से ढंका रहता है। वर्तमान मंदिर का पुनः निर्माण कर इसे भव्य रूप प्रदान किया गया है। हालांकि वास्तविक मंदिर की स्थापना के समय का सही पता किसी को नहीं है। परन्तु ऐसा माना जाता है कि यह बहुत प्राचीन मंदिर है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती ने उनके पिता दक्षेस्वर द्वारा किये यज्ञ कुण्ड में अपने प्राण त्याग दिये थे, तब भगवान शंकर देवी सती के मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड़ का चक्कर लगा रहे थे। इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था। जिसमें सती का सिर इस स्थान पर गिरा था। इसलिए इस मंदिर को श्री सुरकंडा देवी मंदिर कहा जाता है। सती के शरीर के भाग जिस-जिस स्थान पर गिरे थे इन स्थानों को शक्ति पीठ कहा जाता है। सुरकंडा देवी मंदिर में गंगा दशहरे का त्योहार बडे़ धूम-धाम से हर साल मई और जून के बीच मनाया जाता है। कहा जाता है कि नवरात्री में जो भी भक्त सच्चे मन से यहां आकर मां भगवती सुरकंडा की आराधना करता है उसे देवी मनवांचित फल देती है।