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निरोगी शरीर और स्वास्थ्य का रक्षा कवच है प्राण मुद्रा l
August 24, 2019 • seva bharat times

 

निरोगी शरीर और स्वास्थ्य का रक्षा कवच है प्राण मुद्रा 

                       

हस्तमुद्रा क्रमश : 
आज आपको बहुत जरुरी मुद्रा के बारे में बताना हे .. इसे प्राणमुद्रा कहा जाता हैं.इसके करने से शरीर में नई शक्ति उत्पन्न होती हे जो प्राणवायु  का संचार करती है  l

प्राण मुद्रा के फायदे l

प्राण मुद्रा का अभ्यास अगर लंबे समय तक नियमित किया जाए तो ये शरीर में इंसुलिन के स्तर को बैलेंस करने का काम करती है। इतना ही नहीं प्राण मुद्रा का  अभ्यास दिल से लेकर गले तक के रोगों के लिए भी खूब फायदेमंद होता है। प्राण मुद्रा का ये अभ्यास भूख और प्यास को भी नियंत्रित करने का काम करता है। इस अभ्यास से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। तन-मन की दुर्बलता, थकान और नस-नाड़ियों की पीड़ा को दूर करने में में यह मुद्रा खास तौर से उपयोगी है, क्योंकि इससे रक्त शुद्ध होता है। रक्त वाहिनियों के अवरोध भी दूर होते हैं।

इस मुद्रा से मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। तो अगर आपकी आंखों की रोशनी कम हो रही है या फिर देर तक कंप्यूटर और टीवी को देखने से आंखों में जलन होता है या आंखें थक जाती हैं,  आप मुँह में पानी भरकर मुँह बंद कर आँखों पर ठन्डे पानी की छींटे मारे जब तक आपके मुँह का पानी की ठंडक समाप्त न हो जाये जितने समय तक आप ये कर सकें उतने समय तक करें. इसके बाद प्राण मुद्रा करना फायदेमंद होगा। यह नेत्र रोगों में विशेष लाभकारी है। इसके अभ्यास से दृष्टि दोष दूर होता है।
कैसे करें प्राण मुद्रा l

                     

कनिष्ठा, अनामिका और अंगूठे के शीर्ष को मिलाएं। शेष सभी उंगलियों को सीधी रखें। तीनो उँगलियों के पोरो पर हल्का दवाब बनाये रखें बाकि दोनों उँगलियाँ सीधी रखें. प्रतिदिन धीमी, लंबी और गहरी सांस के साथ इसे आप 45 मिनट तक करें।
यदि 45 मिनट लगातार न कर सके तो 18 - 18 मिनट दिन में 3 बार करें. मुद्रा करते समय अपनी रीढ़ का हड्डी सीधी रखें.पद्मासन या सुखासन में बैठ कर इस मुद्रा को किया जा सकता हैं.दोनों हाथ आपके घुटनो पर टिके होने चाहिए और हथेली का मुँह आसमान की और होना चाहिए..किसी भी  मुद्राओ के करने से आपको अवश्य  लाभ होता हे परन्तु इसमें  समय की आवश्यकता  होती हैं l
( प्रय्तेक मुद्रा का नियमित समय 45 मिनट प्रतिदिन हे यदि समय का अभाव हे तो 18 -18  तक दिन में 3 समय भी कर सकते प्राणमुद्रा एक रामबाण मुद्रा है  ..यदि कोई भी मुद्रा करने के पश्च्यात आप प्राणमुद्रा नियमित करते हैं तो उस मुद्रा का प्रभाव दुगुना हो जाता हैं.)

रमन भटनागर