ALL Sports Gadgets and Technology Automobile State news International news Business Health Education National news
  ज्ञान मुद्रा द्वारा दिमाग से जुड़ी सभी बीमारियों का इलाज l
August 23, 2019 • SEVA BHARAT TIMES

                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                ज्ञान मुद्रा द्वारा 

        दिमाग से जुड़ी सभी बीमारियों का इलाज l

 

     

                                                                फोटो  : 1 - ज्ञान मुद्रा l 

 

POSTED BY SEVA BHARAT TIMES ON 23/08/2019

हस्तमुद्रा क्रमश:

ज्ञान के बिना सब पशु समान हैं  ... ज्ञान से ही मनुष्य संसार में सब प्रकार के सुख प्राप्त करते हैं l
महत्व : योग में ज्ञानमुद्रा इसलिए शक्तिशाली कही गई है ‍क्योंकि यह आपकी तंद्रा को तोड़ती है। हाथों की ग्रंथियों का संबंध हमारे मस्तिष्क से होता है। दाएँ हाथ का संबंध बाएँ और बाएँ हाथ का संबंध दाएँ मस्तिष्क से माना गया है। ज्ञानमुद्रा से मस्तिष्क के सोए हुए तंतु जाग्रत होकर मानव के होश को बढ़ाते हैं। ज्ञान का अर्थ  होश से है। होशपूर्ण व्यक्तित्व के चित्त पर किसी भी प्रकार के कर्म या विचारों का दाग नहीं बनता।
 
विधि : अँगूठे को तर्जनी (इंडेक्स) अँगुली से स्पर्श करते हुए शेष तीन अँगुलियों को सीधा रखें । इस मुद्रा के लिए विशेष समय होता हे 45 मिनट प्रतिदिन है। सिद्धासन ,पद्मासन या सुखासन में बैठकर, खड़े रहकर या बिस्तर पर जब भी समय मिले आप इसका अभ्यास कर सकते हैं। 
 

                                   

                                                           फोटोः 2 - ज्ञान मुद्रा l 

लाभ : ज्ञानमुद्रा ज्ञान को बढ़ाती है। अँगुलियों के दोनों ओर की ग्रंथियाँ सक्रिय रूप से कार्य करती हैं। इससे मस्तिष्क तेज और दिमाग की शक्ति बढ़ती है। यह मुद्रा एकाग्रता को बढ़ाकर अनिद्रा, हिस्टीरिया, गुस्सा और निराशा को दूर करती है। यदि इसका नियमित अभ्यास किया जाए तो सभी तरह के मानसिक विकारों तथा नशे की आदतों से मुक्ति मिल सकती है। इसके अभ्यास से मन प्रसन्न रहता है।व् आप समाज में मान सम्मान प्राप्त करते हैं l 

 लेखक :-  श्री रमन भट्नागर l